New Hindi Shayri 2020
New Hindi Shayri 2020
HindiShayri 2020
1. सियासत को लहू पीने की लत है,
वरना मुल्क में सब ख़ैरियत है।
2. Ek Aansoo Bhi Hukoomat Ke Liye Khatra Hai,
Tum Ne Dekha Nahi Aankhon Ka Samundar Hona.
एक आँसू भी हुकूमत के लिए ख़तरा है,
तुम ने देखा नहीं आँखों का समुंदर होना।
3.Siyasat Ki Dukaano Mein Roshni Ke Liye,
Jaroori Hai Ke Mulk Mera Jalta Rahe.
सियासत की दुकानों में रोशनी के लिए,
जरूरी है कि मुल्क मेरा जलता रहे।
4. Ine Umeed Na Rakh Hain Ye Siyasat Wale,
Ye Kisi Se Bhi Mohabbat Nahi Karne Wale.
इन से उम्मीद न रख हैं ये सियासत वाले,
ये किसी से भी मोहब्बत नहीं करने वाले।
5. लडे झगड़ें, भिड़ें, काटें, कटें, शमशीर हो जाएँ,
बटें, बाँटें, चुभे इक दुसरे को, तीर हो जाएँ,
मुसलसल कत्ल-ओ-गारत की नई तस्वीर हो जाएँ,
सियासत चाहती है हम और तुम कश्मीर हो जाएँ।
6.फलसफा समझो न असरारे सियासत समझो,
जिन्दगी सिर्फ हकीक़त है हकीक़त समझो,
जाने किस दिन हो हवायें भी नीलाम यहाँ,
आज तो साँस भी लेते हो ग़नीमत समझो
7.बुलंदी का नशा सिमतों का जादू तोड़ देती है,
हवा उड़ते हुए पंछी के बाज़ू तोड़ देती है,
सियासी भेड़ियों थोड़ी बहुत गैरत ज़रूरी है,
तवायफ तक किसी मौके पे घुंघरू तोड़ देती है।
8.Dilon Ki Band Khidki Kholna Ab Zurm Jaisa Hai,
Bhari Mehfil Mein Sach Bolna Ab Zurm Jaisa Hai,
Har Ek Jyadti Ko Sahen Kar Lo Chupchap,
Shahar Mein Iss Tarah Se Cheekhna Zurm Jaisa Hai.
दिलों की बंद खिड़की खोलना अब जुर्म जैसा है,
भरी महफिल में सच बोलना अब जुर्म जैसा है,
हर एक ज्यादती को सहन कर लो चुपचाप,
शहर में इस तरह से चीखना जुर्म जैसा है।
9.Dino Ki Baat Hai Mefil Ki Aabru Hum The,
Khayal Tha Ke Yeh Pathrav Rok Dein Chal Kar,
Jo Hosh Aaya Toh Dekha Lahu Lahu Hum The.
हमारा ज़िक्र भी अब जुर्म हो गया है वहाँ,
दिनों की बात है महफ़िल की आबरू हम थे,
ख़याल था कि ये पथराव रोक दें चल कर,
जो होश आया तो देखा लहू लहू हम थे।
10.Dilon Ki Band Khidki Kholna Ab Zurm Jaisa Hai,
Bhari Mehfil Mein Sach Bolna Ab Zurm Jaisa Hai,
Har Ek Jyadti Ko Sahen Kar Lo Chupchap,
Shahar Mein Iss Tarah Se Cheekhna Zurm Jaisa Hai.
दिलों की बंद खिड़की खोलना अब जुर्म जैसा है,
भरी महफिल में सच बोलना अब जुर्म जैसा है,
हर एक ज्यादती को सहन कर लो चुपचाप,
शहर में इस तरह से चीखना जुर्म जैसा है।

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